22 अगस्त की रात एक ख़बर आई. मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि उम्मीद है कि पहली कोरोना वायरस वैक्सीन 73 दिन में भारत में बनकर तैयार होने लगेगी. ये भी दावा किया गया कि सरकार ने वैक्सीन का उत्पादन कर रही कंपनी से बात कर ली है, 68 करोड़ वैक्सीन का ऑर्डर भी दे दिया है. लेकिन 23 अगस्त की दोपहरी तक इस पर सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (SII) का बयान आ गया. वही कंपनी, जो वैक्सीन का प्रोडक्शन करने के काम से जुड़ी है. साफ कह दिया कि ये ख़बर ग़लत है, भ्रामक है.

दरअसल ये सारे दावे ‘कोविशील्ड’ नाम की वैक्सीन को लेकर थे. वही वैक्सीन, जो ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्रा नाम की कंपनी मिलकर बना रहे हैं. और इसी वैक्सीन के प्रोडक्शन का जिम्मा (सफल होने पर) मिला है SII को. इसी पर SII ने बयान जारी करते हुए कहा-

“सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया ये साफ करता है कि कोविशील्ड वैक्सीन की उपलब्धता को लेकर किए जा रहे दावे पूरी तरह ग़लत हैं. अभी सरकार ने हमें केवल वैक्सीन प्रोडक्शन के लिए तैयारियां पूरी रखने के लिए कहा है, ताकि भविष्य में वैक्सीन तैयार होने पर इसका भारी मात्रा में प्रोडक्शन किया जा सके.”

दावा ये भी था कि देश में लोगों को फ्री में लगाई जाएगी. राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के तहत. इस पर अभी कोई दूसरा बयान या स्पष्टीकरण नहीं आया है. यानी कुल मिलाकर इस दावे पर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है.

तीसरे फेज़ की जिस ट्रायल को तेजी से पूरा करने की बात सीरम इंस्टिट्यूट कर रहा है, उसे पूरा होने में अमूमन 7 से 8 महीने तक का समय लगता है. लेकिन कोरोना के बढ़ते इंफेक्शन को देखते हुए ऑक्सफर्ड इस फेज़-3 ट्रायल को जल्दी पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं. ये ट्रायल अलग-अलग 17 सेंटर पर चल रहा है. हर सेंटर से करीब 100 वॉलंटियर्स जुड़े हैं, जिन्हें वैक्सीन डोज़ दी जा रही है.

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