बिहार में शुक्रवार को 29 कोरोना पॉजिटिव मरीज मिले। इन २ ९ मरीजों में से १ ९ रोगी अधिक हैं, जो विशेष ट्रेन से श्रम करके बिहार लौटे थे। इनमें से अधिकांश मरीज समस्तीपुर जिले के हैं जो पश्चिम बंगाल से आए थे और संगरोध केंद्र में रहे। इसके अलावा, सुपौल और सहरसा जिलों में शक्ति रोगी पाए गए हैं जो केवल अतीत में आए थे।

संबंधित अधिकारी नियनित रूप से करें क्वारन्टीन सेंटरों का निरीक्षण: सीएम नीतीश

जिसके बाद से मजदूरों को लेकर आ रही ट्रेनों को बंद करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसी कड़ी में गुजरात से बिहार आने वाली ट्रेनों पर रोक लगा दी गई है। सूरत जिला कलेक्टर धवल पटेल ने बताया कि ओडिशा, बिहार, झारखंड और राजस्थान सरकार ने ट्रेनों के मंज़ूरी रद्द कर दी है इसलिए इन राज्यों को जाने वाली तमाम ट्रेन रद्द कर दी गई है। जबतक नया ऑर्डर नहीं आएगा तब तक ट्रेन नहीं चलायी जाएंगी। बता दें कि शुक्रवार को झारखण्ड के गढ़वा में भी बाहर के राज्य से आए 20 मजदूर कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। वहीं ओडिशा हाई कोर्ट ने भी आदेश जारी किया है कि जिन लोगों का कोरोना जांच रिपोर्ट नेगेटिव होगा उन्हें ही ओडिशा लाया जा सकता है। गुजरात से ओडिशा पहुँचे 25 से अधिक लोगों का कोरोना टेस्ट पॉज़िटिव मिला है। जिसके बाद गंजाम जिला को रेड ज़ोन घोषित कर दिया गया है।

बिहार में भी लोगों को ट्रेन से उतरने के बाद गृह जिलों तक ले जाने के दौरान काफी लापरवाही बरती जा रही है। बसों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं किया जा रहा है। क्वारंटाइन सेंटरों से भी मजदूरों की काफी शिकायतें आ रहीं हैं और मीडिया के प्रेवश पर भी रोक लगा दी गई है। हालांकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि क्वारन्टीन सेंटरों का नियमित रूप से निरीक्षण करें। साथ ही कोरोना संक्रमितों की कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग के साथ-साथ रणनीति बनाकर रैंडम टेस्टिंग की व्यवस्था में भी तेजी लाएं। रेड जोन में आने वाले लोगों की प्राथमिकता के आधार पर टेस्टिंग कराएं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि सभी जिलों में टेस्टिंग के लिए ट्रुनेट किट्स की सुविधा का शीघ्र संचालन करें। यह भी सुनिश्चित करें कि वहां भी टेस्टिंग किट की पर्याप्त उपलब्धता हो।

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