कानपुर हत्याकांड का मुख्य आरोपी विकास दुबे 10 जुलाई की सुबह कथित पुलिस एनकाउंटर में मारा गया. कानपुर नगर के भौंती में हुए इस एनकाउंटर के बाद पुलिस की थ्योरी और दावों पर कई सवाल भी उठ रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट की 2014 की गाइडलाइंस के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार मामले में ‘जांच’ बिठाएगी. जांच का ‘नतीजा’ क्या हो सकता है, इसके लिए कुछ पुराने रिकॉर्ड पर नज़र डालते हैं.

यूपी पुलिस और क्लीन चिट

इंडियन एक्सप्रेस अख़बार ने एक रिपोर्ट छापी है. इसके मुताबिक, मार्च, 2017 में यूपी में योगी आदित्यनाथ सरकार आने के बाद विकास दुबे 119वां आरोपी है, जो पुलिस की कथित क्रॉस फायरिंग में मारा गया है. इनमें 74 एनकाउंटर केस, जिनमें आरोपियों की मौत हुई, मैजिस्ट्रियल इन्क्वायरी बैठी. जांच पूरी हुई. सबमें पुलिस को क्लीन चिट मिल गई. 61 मामलों में पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट को कोर्ट ने स्वीकार कर लिया.

रिकॉर्ड के मुताबिक, 6,145 ऑपरेशन हुए जिनमें 119 आरोपियों की मौत हुई और 2,258 घायल हुए. इनमें 13 पुलिसवालों की जान गई, जिनमें वो 8 पुलिसवाले भी शामिल हैं, जो 2-3 जुलाई की दरमियानी रात कानपुर में शहीद हुए. इन सारे ऑपरेशन में कुल 885 पुलिसकर्मी घायल हुए.

सुप्रीम कोर्ट का दखल लेकिन…

कोर्ट के बड़े फैसलों के बाद लीगल फ्रेमवर्क और स्वतंत्र जांच के बावजूद एनकाउंटर को लेकर प्रक्रिया की अब तक धज्जियां उड़ाई जाती हैं. उत्तर प्रदेश में हुए एनकाउंटर्स में भी सुप्रीम कोर्ट ने दखल दिया है. जनवरी 2019 में इसे कोर्ट ने ”गंभीर मसला” करार दिया था. पीपल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज सुप्रीम कोर्ट गया था. 1000 एनकाउंटर के मामलों के साथ, जिनमें 50 लोगों की मौत हुई थी. ये केस की जुलाई 2018 से फरवरी 2019 के बीच चार बार सुनवाई हुई लेकिन अभी तक केस लिस्टेड नहीं हुआ है. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग भी साल 2017 से यूपी सरकार को कम से कम तीन नोटिस दे चुका है. सरकार अपना बचाव करते हुए सबका कॉमन जवाब देती है. इन पर भी कोई बात आगे नहीं बढ़ी है.

राज्य सरकार और पुलिस

एनकाउंटर के मामलों में जांच में तो देरी होती ही है, राज्य सरकारें भी पुलिस के साथ खड़ी दिखती हैं. मार्च, 2019 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को फटकार लगाई. 11 पुलिसवालों की सज़ा निलंबित करने के लिए. इन्हें 2013 के फेक एनकाउंटर केस में सेशंस कोर्ट की तरफ से दोषी पाया गया था. कोर्ट ने सरकार का आदेश खारिज कर दिया.

2014 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि एनकाउंटर के मामलों में FIR दर्ज करना अनिवार्य है और पुलिस ऐक्शन में हुई मौतों की मैजिस्टीरियल जांच ज़रूरी है. दिसंबर, 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने हैदराबाद गैंगरेप मामले में एक स्वतंत्र जांच का आदेश दिया. इस चर्चित रेप मामले में 26 साल की एक वेटरनरी डॉक्टर का रेप और मर्डर किया गया था.

इस मामले में तेलंगाना पुलिस ने आरोपियों का कथित एनकाउंटर कर दिया था. विकास दुबे मामले की ही तरह कहा गया कि उन्होंने हथियार छीनकर भागने की कोशिश की. घटना के करीब सात महीने बाद भी जांच जारी है.

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