छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी अब इस दुनिया में नहीं रहे। अजीत जोगी ने रायपुर के देवेन्द्र नगर स्थित नारायणा अस्पताल में 3:30 बजे आखिरी सांस ली। जोगी लंबे समय से तबीयत खराब होने की वजह से अस्पताल में भर्ती थे। आईपीएस और फिर आईएएस से लेकर मुख्यमंत्री पद तक का सफ़र तय करने वाले अजीत जोगी राजनीति के धुरंधरों में गिने जाते रहे हैं।

नंगे पैर स्कूल जाने से लेकर इंजीनियरिंग की पढ़ाई और ईसाई धर्म अपनाने से लेकर प्रशासनिक सेवा तक के सफ़र ने जोगी को परिपक्व बना दिया था। जोगी को ‘सपनों का सौदागर’ भी कहा जाता रहा है। साल 2000 में जब जोगी ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तो जोगी ने ख़ुद अपने को ‘सपनों का सौदागार’ कहा था। उन्होंने कहा था कि- ‘हाँ मैं सपनों का सौदागर हूँ। मैं सपने बेचता हूँ।’ जोगी ने मुख्यमंत्री बनते ही भारतीय जनता पार्टी में सेंध मार दी और उनके 12 विधायकों को अपने साथ शामिल कर लिया था। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि कांग्रेस पार्टी का हाईकमान उन पर इसी खूबी की वजह से ही भरोसा करता था और छत्तीसगढ़ के मामलों में सीधे हस्तक्षेप नहीं करता था। जोगी की जिन्दगी में नई चुनौती साल 2004 में आई।

जोगी एक सड़क हादसे में वो बाल बाल बच तो गए लेकिन उनकी कमर से नीचे का हिस्सा काम करना बंद कर चुका था और वो ‘व्हील चेयर’ पर आ गए। यह हादसा भी उनके जज़्बे को कम नहीं कर पाया और कांग्रेस पार्टी में उनकी इच्छा के बगैर पत्ता भी नहीं हिलता था। मामला चाहे टिकट का बंटवारे का हो या टिकट काटने का। मज़बूत और ज़मीनी पकड़ रखने वाले क्षेत्रीय दल की कमी की वजह से प्रदेश के लोगों के पास भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के रूप में बस दो ही विकल्प थे। अजित जोगी ने विकल्प देने के लिए जनता जोगी कांग्रेस छत्तीसगढ़ नाम के एक राजनीतिक दल का गठन किया, वो भी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले। जब ‘सपनों के सौदागर’ को सामना करना पड़ा था हार का 2003 में हुए विधानसभा चुनावों में ‘सपनों के सौदागर’ को हार का सामना करना पड़ा। फिर 2008 में और 2013 में भी वो सपने नहीं बेच पाए। इसके बाद 2018 विधानसभा चुनावों के ठीक पहले उन्होंने हुकुम का इक्का फेंका और एक नई पार्टी बना ली। हालांकि उनका हुकुम का इक्का अभी तक कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाया है। लेकिन जोगी जनता कांग्रेस पार्टी का निर्माण भविष्य में छत्तीसगढ़ की राजनीति में नये मोड़ ला सकता है। जानकारी के मुताबिक 74 साल के जोगी को दिल का दौरा पड़ा था जिसके बाद उन्हें रायपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां शुक्रवार दोपहर उनका निधन हो गया।

 

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