बिहार के पूर्व सीएम के घर भुखमरी जैसी स्थिति हो चुकी है ये 60 के दशक में तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके भोला पासवान शास्त्री के परिवार की है। पूर्णिया के बैरगाछी में रह रहे भोला पासवान की परिवार की स्थिति बहुत ही खराब हो चुकी है वे लोग भी लॉक डाउन के कारण दाने-दाने को मोहताज हो गए हैं।

भोला पासवान कांग्रेस के पार्टी से राज्य के आठवें मुख्यमंत्री बने वह बिहार के पहले दलित मुख्यमंत्री थे, बहुत ही ईमानदार, कर्मठ और नेक व्यक्ति थे। इन्हें राजनीति का विदेह कहा जाता है, वे तीन दशक पहले दुनिया को अलविदा कह गए। उनकी अपनी कोई भी संतान ना होने के कारण वे अपने भाई के लड़के को ही अपनी संतान की तरह मानते थे। 1968 में वे पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने थे इसके बाद 1969 में दूसरी बार और 1971 में तीसरी बार सीएम बने थे। भोला पासवान शास्त्री केंद्रीय मंत्री राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष, और चार बार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चुने गए।

सरकारी खजाने को अपने निजी फायदे के लिए कभी उपयोग में नहीं लाया जब ये दुनिया को अलविदा कहे तो श्राद्ध कर्म के लिए भी चंदा लेने की आवश्यकता पड़ी थी। इससे आप आसानी से अंदाजा लगा सकते हैं। पूर्णिया और पटना के राजकीय क्षेत्र में भोला पासवान शास्त्री की जयंती भी प्रत्येक वर्ष मनाई जाती है। भोला पासवान शास्त्री के घर में लगभग 25 सदस्य हैं वे सभी दीहारी कर कर खाने वाले लोग हैं। घर में एक व्यक्ति के पास ही राशन कार्ड है। उनके परिवार को सरकार द्वारा भी कोई खास मदद नहीं मिलता है।

 

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