बिहार सरकार ने अपने विरोध में उठने वाले हर आवाज को दबाने का फरमान जारी कर दिया है. नीतीश सरकार ने फरमान जारी किया है कि क्वारंटाइन सेंटर की कुव्यवस्था के खिलाफ बोलने वालों मजदूरों को सरकार के द्वारा क्वारंटाइन पीरियड ख़तम होने के बाद दी जाने वाली आर्थिक सहायता नहीं दी जाएगी.

बिहार के आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखा है. उन्होंने जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे लाउडस्पीकर लगवा कर सारे क्वारंटीन सेंटर में घोषणा करा दें. वो भी 24 घंटे के भीतर. अगर किसी ने विरोध प्रदर्शन किया तो उसे फूटी कौड़ी नहीं मिलने वाली है.क्वारंटीन सेंटर में रह रहे जो भी प्रवासी अनुशासित ढंग से 14 दिनों प्रखंड क्वारंटीन सेंटर के बाद 7 दिन अपने घरों में होम क्वारंटीन रहेंगे, उन्हें ही रेल भाड़ा वापस किया जायेगा और सरकार द्वारा घोषित दूसरी मदद दी जायेगी.

जिलाधिकारियों को भेजे गये अपने पत्र में के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने लिखा है “आप सभी अवगत हैं कि प्रखंड क्वारंटीन सेंटर में राज्य से बाहर से लौटे मजदूरगण बड़ी संख्या में आवासित हैं. कतिपय व्यक्तियों द्वारा घर जाने के लिए न सिर्फ दवाब बनाया जा रहा है बल्कि अनुशासन भंग होने की भी सूचनायें प्राप्त हो रही हैं यथा सड़क जाम इत्यादि.” आपदा प्रबंधन सचिव ने अपने पत्र में लिखा है “आप अवगत हैं कि शिकायतों के निवारण हेतु सभी जिला मुख्यालयों में नियंत्रण कक्ष स्थापित है और इसका नंबर सभी क्वारंटीन सेंटरों में भी प्रदर्शित है. अतः शिकायतों के समाधान के लिए अनुशासन भंग करना या कानून को अपने हाथ में लेने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती है.”

बता दें कि बिहार के लगभग सभी जिलों के क्वारंटाइन सेंटर से नित्य ये खबर आ रही है कि मजदूरों ने कुव्यवस्था के खिलाफ में विरोध किया है. ऐसे में व्यवस्था में सुधार के बजाय मजदूरों के आवाज को दबाने वाला कदम निश्चित रूप से नीतीश सरकार के तानाशाही रूख अख्तियार करने जैसा है.

Input – ABP

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