एक तरफ, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बयान देने से नहीं थकते कि उन्होंने कल सरकारी विभाग को आदेश दिया था कि किसी भी मजदूर को अगर पैदल चलते देखा जाए, तो उसे तुरंत एक कार उपलब्ध कराई जाए और उन्हें उनके गंतव्य तक पहुँचाया जाए। तक पहुँचाया जाए। लेकिन सच्चाई कुछ और ही बताती है। दरअसल, दिल्ली से धनबाद आए मजदूरों को उनके गंतव्य तक जाने के लिए कार मुहैया नहीं कराई गई। जिसके कारण कुछ कार्यकर्ता पैदल ही दुमका के लिए रवाना हो गए। आपको बता दें कि धनबाद से दुमका की दूरी लगभग 170 किलोमीटर है। इस चिलचिलाती गर्मी में मजदूर पैदल अपने घर कैसे जाएंगे और अगर बीच में कोई दुर्घटना होती है, तो इसके लिए कौन जिम्मेदार होगा?

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