भारत बना रहा है “कोरोना वैक्सीन”

कोरोना वायरस का संक्रमण दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। अब तक भारत में लगभग 6,48000 लोग संक्रमित हुए हैं, जिसमें 3,94000 लोग ठीक हो चुके हैं तथा 18,655 लोगों की मृत्यु हो चुकी है। ऐसे में भारत के अनेक मेडिकल संस्थाएं कोरोना वैक्सीन बनाने में जुटे हुए हैं, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की तरफ से भी 15 अगस्त तक कोरोना वैक्सीन बनाने की खबर आई है। ऐसे में विपक्षी राजनीतिक पार्टियों का कहना है कि आईसीएमआर सरकार को लाभ पहुंचाना चाह रही है। इन सारी बातों पर शनिवार को आईसीएमआर के महानिदेशक बलराम भार्गव ने सफाई दी है, उन्होंने कहा कि, “भारतीय लोगों की सुरक्षा और उनके हित हमारे लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता है। हमने पुराने पत्र में यह कहा था कि ट्रायल में बेवजह की अड़चनों से बचने की कोशिश की जाए, बिना आवश्यक प्रक्रिया को दरकिनार किए ट्रायल में तेजी लाई जाए।“

इसी हफ्ते आईसीएमआर की तरफ से कोरोना की वैक्सीन पर कार्य कर रही 12 संस्थाओं को पत्र लिखा था, जिसमें फास्ट ट्रैक क्लिनिकल ट्रायल करने के लिए कहा गया था। इसमें कहा गया था कि संस्था 15 अगस्त को कोरोना वैक्सीन लांच करने के बारे में सोच रही है। ऐसे में 15 अगस्त तक वैक्सीन लंच करने की बात पर एक्सपर्ट्स ने भी चेतावनी दी, कहा था कि समय से पहले वैक्सीन रिलीज करना फायदे से ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है। 1955 में ओरिजिनल साल्क पोलियो वैक्सीन बनाने में जल्दबाजी दिखाई गई थी, लेकिन इससे कोई अच्छी परिणाम नहीं मिले, बड़े स्तर पर वैक्सीन के निर्माण में हुई गड़बड़ी से 70,000 बच्चे पोलियो की चपेट में आ गए थे। 10 बच्चों की मौत हो गई थी।

देश में कोरोना की पहली वैक्सीन को हैदराबाद की फार्मा कंपनी भारत बायोटेक ने तैयार किया है, इसे आईसीएमआर और नेशनल इंस्टीट्यूट आफ वायरोलॉजी पुणे के साथ मिलकर बनाया गया है। जानवरों पर इसका ट्रायल कामयाब रहा है और इंसानों पर भी परीक्षण करने के लिए हाल ही में मंजूरी मिली है। ट्रायल इसी महीने शुरू हो रहे हैं। भारत बायोटेक के मुताबिक वैक्सीन हैदराबाद के जीनोम वैली में BSL-3 (बायो-सेफ्टी लेवल 3) हाई कंटेनमेंट फैसिलिटी में तैयार किया गया है।

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