भारत और चीन में तनाव जारी है, पूर्वी लद्दाख में गलवान घाटी के हिंसा में भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे, तब से पूरे भारत में चीनी वस्तुओं का बहिष्कार किया जा रहा है, जिससे चीन सबक सीख सके। इसी में 14वे तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा का 85वां जन्मदिन मनाया जा रहा है और उनके अनुयायियों में इस दिन को लेकर काफी खुशी है। अपने जन्मदिन के अवसर पर दलाई लामा ने ट्विटर पर अमेरिकन भौतिक विज्ञानी डेविड बोह्रा के बारे में स्पेशल ऑनलाइन स्क्रीनिंग की योजना का ऐलान किया है, इस बात का ऐलान लामा ने एक हफ्ते पहले ही की थी, जिन्हें धर्मगुरू अपने विज्ञानों के गुरुओं में से एक मानते हैं। रविवार को दलाई लामा ने जन्मदिन से 1 दिन पहले ताइवान में आयोजित समारोहों के दौरान जनरल टीचिंग ऑनलाइन की ट्रेनिंग भी दी। 14वें दलाई लामा का जन्म 6 जुलाई, 1935 को हुआ था। बचपन में वे तिब्बतियों के परेशानियों को समझने लगे तथा चीन के खिलाफ आवाज उठाने लगे थे। भारत ने.दलाई लामा को शरण उस समय दी थी, जब वह मात्र 23 वर्ष के थे। दलाई लामा को मुख्य रूप से शिक्षक के तौर पर देखा जाता है क्योंकि लामा का मतलब गुरु होता है। दलाई लामा अपने लोगों को सही रास्ते पर चलने की प्रेरणा देते हैं।

दरअसल 13वे दलाई लामा ने 1912 में तिब्बत को चीन से स्वतंत्र घोषित कर दिया था और इस वजह से सन 1950 में चीन के लोगों ने तिब्बत पर आक्रमण कर दिया था, यह तब हुआ था जब 14वे दलाई लामा के चुनने की प्रक्रिया चल रही थी, इस लड़ाई में हार का सामना करना पड़ा, उसके कुछ सालों बाद तिब्बत के लोगों ने चीनी शासन के खिलाफ विद्रोह शुरू कर दिया, अपनी आजादी की मांग करने लगे, हालांकि सफलता नहीं मिली। दलाई लामा को लगा कि वह चीन के चंगुल में बुरी तरह फस जाएंगे, इसलिए उन्होंने 1959 में भारत में शरण ली, उनके साथ भारी संख्या में तिब्बती भी भारत आए थे। भारत में निर्वाचन में रह रहे उनकी संख्या 80,000 से अधिक है और यह हिमाचली शहर में निर्वासन करने लगे। चीन को भारत द्वारा शरण देना अच्छा नहीं लगा और उसे डर था कि दलाई लामा उसके तानाशाही और क्रूरता के बारे में दुनिया को ना बता दे और अभी चीन-भारत के बीच तनाव जारी है, अभी चीन को डर है कि जन्मदिन पर दलाई लामा कोई खास टिप्पणी ना कर दे।

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