भारत में लगभग 1.6 % लोग डिप्रेशन का शिकार है, जोकि डेढ़ करोड़ से ऊपर की संख्या है। डिप्रेशन किसी को भी हो सकता है इसके लिए कोई आयु सीमा निर्धारित नहीं है। आजकल छोटे-छोटे बच्चे स्कूल में कुछ ख़ास नहीं कर पाते तो वह डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं, उन्हें लगता है अब सब कुछ ख़त्म हो गया लेकिन ऐसा नहीं है, ये हमारे अंदर की नकारात्मक भावना है, जो हमारे दिमाग़ पर हावी हो जाती है जो हमारी सोचने की क्षमता को कम कर देती है। जिसे हम डिप्रेशन का नाम दे देते हैं। कॉलेज छात्र, ऑफ़िस जाने वाले व्यक्ति आज जिधर देखो उस फ़ील्ड में डिप्रेशन के मरीज़ मौजूद हैं।
आज के युवा पीढ़ी प्यार में धोखे या ब्रेकअप के बाद अक्सर डिप्रेशन का शिकार होते हैं, वह स्वयं को हानि पहुँचाने की हर संभव कोशिश करते हैं, जो कि बेहद ग़लत बात है सर्वप्रथम हमें स्वयं से प्यार करना सीखना है। हालाँकि व्यक्ति मन में ठान ले तो वह डिप्रेशन जैसी बिमारी से बहुत जल्द ही बाहर आ सकता है यह केवल हमारे अंदरूनी दृढ़ निश्चय पर आधारित है। डिप्रेशन के कारण कई लोग सुसाइड का ख्याल सोचते हैं, लेकिन सुसाइड समाधान नहीं है हमें अपना जीवन ख़त्म करके हारना नहीं है हमें जीते जी उस बीमारी से लड़ना है और आगे बढ़ना है।
डिप्रेशन से उबरने के उपाय-
  1. डिप्रेशन में हमें प्रत्येक वह काम करना है जो हमे दिल से ख़ुशी पहुँचाए।
  2. दोस्तों के साथ बाहर जाना बैठना बातें करना अपनी भावनाओं के बारे में बात करना।
  3. योग का सहारा लेना, योग से मनुष्य में सकारात्मक भाव उत्पन्न होते हैं तथा नकारात्मक भावों से छुटकारा मिलता है।
  4. हमें तरोताज़ा रहने के लिए प्रत्येक दिन आठ घंटे की नींद अवश्य लेनी है।
  5. दिन का कुछ समय सूरज की रोशनी में अवश्य बिताना है।
  6. अपनी डिप्रेशन की समस्या पर परिवार से बात करनी है कई बार बातों से ही समस्या का निवारण होता है।
  7. पौष्टिक आहार खाएं।
  8. जितना हो सके लोगों से घुले मिले बातें करें अकेलेपन का त्याग करें।

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