क्वारंटीन सेंटर में राजकुमार पासवान उर्फ़ डोमा पासवान भूख से तड़प-तड़प कर मर गया। लेकिन उसके मौत से भी दुःखद है कि जिले के डीएम साहब ने भूख से हुई मौत को अफवाह बता दिया है, जबकि बेटा चीख-चीख कर कह रहा था कि मेरे पिता को चेन्नई से मधुबनी तक में अन्न का दाना नसीब नहीं हुआ था। मधुबनी जिलाधिकारी डॉ निलेश राम चंद्र देवरे ने फेसबुक पर प्रेस विज्ञप्ति जारी कर यह भी बता दिया है कि उसने जलपान कहाँ किया था और किस रिश्तेदार के यहां भोजन किया था।

मधुबनी DM का फेसबुक पोस्ट:

मधुबनी जिलाधिकारी ने फेसबुक पर लिखकर मृतक के ट्रैवल हिस्ट्री के बारे में बताया है कि उसके साथियों से यह पता चला कि घटना स्थल पर पहुंचने से पहले मृतक दिनांक 18 मई को चेन्नई से ट्रेन से चला था। दिनांक 20 मई को वह बरौनी स्टेशन विश्राम स्थल पर रात में रुका और वहीं खाना खाया। दिनांक 21 मई को वह मधुबनी स्टेशन पहुंचा जहां से वह सरकारी बस से बासोपट्टी प्रखंड के लिए निकला।

इस क्रम में वह करीब 4 बजे शाम हरलाखी प्रखंड के करुणा ग्राम में अपने परिचित के यहां खाना भी खाया था। शाम 5 बजे मृतक अपने साथियों के साथ पैदल प्राथमिक विद्यालय, वीरता पहुंचा जहां पेट में दर्द होने पर उसके परिजनों ने उसे Eno का घोल पिलाया। जिससे यह स्पष्ट है कि मौत भूख से नहीं हुई है।

डीएम ने ही खोल दी सिस्टम की पोल:

डीएम साहब के अनुसार मृतक ने रात का खाना बरौनी में खाया था, जिसके बाद अगले दिन शाम को भी अपने परिचित के यहाँ खाना खाया था। जी हाँ, ये डीएम साहब खुद अपने व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं कि बाहर से आ रहे प्रवासी मजदूर पहले अपने परिचित के यहां जाते हैं और खाना खाते हैं। रिश्तेदारी निभाते हैं फिर क्वारंटीन सेंटर भी न जाकर खुद से गाँव के स्कूल में रहने चले जाते हैं।

जिलाधिकारी महोदय के बयान को पढ़ने के बाद नीचे ये वीडियो देखिए। ये मृतक के पुत्र उमेश पासवान का बयान है। उमेश ने कहा कि मेरे पिता को खाना कहीं नहीं मिला।

मृतक के पुत्र का बयान और जिलाधिकारी के पक्ष को देखते हुए जिला प्रशासन मृतक के पुत्र के ऊपर झूठ बोलने का आरोप लगा दें, इस संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। क्योंकि जिलाधिकारी मधुबनी की रडार में मृतक अपने रिश्तेदार के यहां खाना खाया था।

चूंकि मृतक के पुत्र ने मैथिली में बोला है। अतः आप अगर मैथिली नहीं भी समझते हैं तो भी वीडियो देखिए, थोड़ा बहुत समझ आ जाएगा। फिर नीचे हिंदी अनुवाद पढ़िएगा। लेकिन आग्रह कि वीडियो जरूर देखिए, अंत में मुखिया का भी बयान है। उसके बाद जिलाधिकारी महोदय का पोस्ट फिर से पढ़िए…. फिर हमें कुछ कहने या लिखने की जरूरत नहीं होगी।

मरने से पहले ही कहा था लगता है अब इस दुनिया में नहीं रहूँगा:

मृतक के पुत्र ने वीडियो में कहा है कि मद्रास (अब चेन्नई) से मधुबनी आने तक कुछ नहीं खाया है। संवाददाता ने पूछा भी है कि खाना खाया नहीं या फिर खाना मिला ही नहीं था? उमेश ने कहा कि मेरे परिवार को पूरे रास्ते कहीं खाना मिला ही नहीं भूखे आए हैं। कोई भी व्यक्ति खाना लेकर आया ही नहीं। जिसके बाद शाम को गाँव के स्कूल में परिवार ने कुछ खाने को कहा तो मृतक ने कहने से यह कहकर इनकार कर दिया कि चक्कर आ रहा है, पेट में दर्द कर रहा है। बाथरूम से आता हूँ।

आने के बाद मृतक ने अपनी पत्नी से कहा कि अब नहीं लग रहा है कि इस दूनिया में रहूँगा और इसके कुछ ही देर बाद उसकी मौत हो गई। आगे मृतक के पुत्र ने वीडियो में यह भी कहा है कि शाम में प्रशासन यह वादा करके गई थी कि सुबह सैंपल लेने के बाद शव का अंतिम संस्कार करा दिया जाएगा। वीडियो में ही गाँव के मुखिया ने इस बात को स्वीकार किया है कि घटना को करीब-करीब 15 घंटा होने को है लेकिन प्रशासन लाश की जांच करने नहीं आई है।

इस प्रकरण में जिलाधिकारी मधुबनी के सामने कुछ सवाल हैं, जिसका जवाब शायद ही वह दें सकें:

  • जिलाधिकारी महोदय क्या आपने या आपके अधीन किसी भी अधिकारी ने कोरोना संक्रमण के दौरान किसी भी ख़बर की पुष्टि की है ?
  • मीडिया के किसी भी सवालों का जवाब दिया है ? उक्त मामले में पक्ष जानने के लिए हमारी टीम ने भी अंधराठाढ़ी BDO को लगभग 20 से 25 बार कॉल किया था, लेकिन उन्होंने कॉल नहीं उठाया, जवाब देना उचित नहीं समझा।
  • आप ही बताएं ऐसी परिस्थिति में मीडिया खबरों की पुष्टि कैसे करें ?

एकपक्षीय संवाद कितना उचित?

  • ट्विटर पर आप अतिसक्रिय थे। एक पक्षीय ही सही लेकिन ट्विटर आपसे सवांद का एक जरिया था। आपने उस रास्ते को भी बंद कर दिया। अपना ट्विटर अकाउंट निष्क्रिय कर दिए।
  • मीडिया की खबर का फैक्ट चेक करके आप अफवाह करार दे दिए, साथ ही तमाम मीडिया कर्मी को जिला प्रशासन मधुबनी के पेज पर कमेंट करने से ब्लॉक कर दिए।
  • आखिर क्यों?
  • क्या यह न्यायसंगत है कि आप आरोप लगा दें और पक्ष रखने का अधिकार भी छीन लें ?

मधुबनी में कोरोना जांच क्यों नहीं?

  • जिले में अब तक 10 हजार से अधिक प्रवासी आ चुके हैं जिनमें 1845 लोगों का जांच किया गया है और 147 सैंपल पॉजिटिव पाए गए हैं। यानी कुल 12 % सैंपल पॉजिटिव पाए गए हैं।
  • क्या यह माना जाए कि इन 10 हजार में भी 12 % लोग संक्रमित हो सकते हैं ?
  • क्योंकि किन्ही पॉजिटिव मरीज में भी कोरोना के लक्षण नहीं हैं तो जांच के अभाव में ये भी निगेटिव ही माने जा रहे हैं। विदित है कि हमारे प्रधानमंत्री भी कह चुके हैं कि देश में टेस्टिंग का अभाव नहीं है।
  • जांच रिपोर्ट आने में तीन दिन का समय लगता है। मधुबनी जिला मुख्यालय में ही जांच संभव हो सके, इस दिशा में कोई प्रयास किया है आपने ?

दरभंगा में जांच सुविधा फिर पटना से तीन दिन बाद क्यों आता है रिपोर्ट?

  • जब दरभंगा में जांच सुविधा उपलब्ध है फिर जांच के लिए सैंपल आरएमआई पटना क्यों भेजा जा रहा है?
  • यदि दरभंगा में बड़ी संख्या में जांच संभव नहीं है तो इसके निराकरण के लिए राज्य सरकार से आपकी कोई बात हुई है?
  • क्या आपने मधुबनी में ही जांच सुविधा मुहैया कराने को कहा है ?

मृतक का रिश्तेदार के यहां जाना किसकी लापरवाही है:

  • जिस विद्यालय में राजकुमार की मृत्यु हुई यदि वह क्वारंटीन सेंटर नहीं था, तो बड़ा सवाल आपसे ही बनता है कि बाहर के राज्य से आए प्रवासी को क्वारंटीन क्यों नहीं किया गया ?
  • वह अपनी मर्जी से अन्यत्र किसी स्कूल में रहने कैसे चला गया ?
  • राजकुमार चेन्नई से बरौनी आया फिर वहां से मधुबनी और यहां बस स्टैंड से गाँव गया। निश्चित है बस के साथ प्रशासन की गाड़ी क्वारंटीन सेंटर तक छोड़ने गई होगी। जैसा कि आपने कहा कि रास्ते में वह रिश्तेदार के यहां खाना खाने चला गया था। तो यह कैसे हुआ ?

गौरतलब है कि मौत के साथ हुई यह तमाम घटनाक्रम मधुबनी जिले के प्रशासनिक सिस्टम पर सवालिया निशान खड़े कर रही है। लेकिन जवाब देने के लिए जिम्मेदार मधुबनी डीएम ना तो मीडियाकर्मियों के सवालों को जवाब देना पंसद करते हैं ना ही जरूरत पड़ने पर किसी का फोन उठाते हैं। इसके परे डीएम मीडियाकर्मियों पर ही दोष मढ़ते हुए एकपक्षीय संवाद कर सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी साख बचाने में लगे हुए हैं।

Input – ABP

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