इंसान की अमीरी सिर्फ पैसों से नहीं नापी जा सकती। कुछ लोग ऐसे भी हैं दुनिया मे जो खुद भले ही कम मे सुकून मना ले लेकिन ध्यान रखते है कि हमारे आस पास कोई भी भूखा पेट ना सोये। यह लोग हीरो से कम नहीं हैं।ऐसी ही एक शख्स है कमलाथल, जो तमिलनाडु की एक महिला है और समान्य कीमत एक रूपए की इडली परोसने के लिए प्रसिद्ध है।
कमलनाथ 30 साल से, हर दिन वह सूर्योदय से पहले उठती है और सांभर और चटनी बनाने मे जुट जाती है ताकि जरूरतमंद लोगों को सांभर और चटनी खिलाई जा सके। उन्होंने इडली की कीमत कम रखने का कारण ये है कि दिहाड़ी मजदूर अपना दिन पूरे पेट से शुरू कर सकते हैं और अपने परिवार के लिए पैसा बचा सकते हैं।
जहां महंगाई के चलते हर चीज निजी दाम से ज्यादा कीमत मे बिकने लगी है, वहीं उन्होंने कीमतों में बढ़ोतरी करने से इनकार कर दिया है और उसी सस्ती दर पर बिक्री करना जारी रखा है। इस नुकसान के बावजूद भी, वह नहीं चाहती कि गरीब भूखा रहे। कमलाथल तमिलनाडु के वादिवेलाम्पलायम गाँव की  85 वर्षीय महिला हैं। ‘इडली अम्मा’ के रूप में जानी जाने वाली महिला पिछले 30 वर्षों से अपना व्यवसाय चला रही है।
कोरोनोवायरस के प्रकोप के बाद से उन्हें अपने व्यवसाय मे मुश्किलें हो रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रवासी श्रमिक उनके पास आते हैं और साथ ही मदद भी करते हैं। कई लोगों ने कच्चे माल को भेजना भी शुरू कर दिया है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वह 1 रूपए के लिए भोजन बेचना जारी रख सके।
उनकी कोशिश ये है कि जरूरतमंद लोग उनसे भोजन ख़रीदने मे सक्षम रहे। यह समय की जरूरत है कि हम सभी को अपने आसपास के लोगों की मदद करने के लिए खुल कर सामने आए और के कमलथल की कहानी से प्रेरणा ले।

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