दिल्ली में कोरोना के लगभग 31 हज़ार केस हैं जिनमें से बारह हज़ार ठीक होकर घर जा चुके हैं शेष 19 हज़ार एक्टिव केस है, जिनमें 900 से ऊपर लोगों की मौत हो चुकी है। दिल्ली की स्थिति देखते हुए केजरीवाल सरकार ने यह फ़ैसला लिया है की दिल्ली में सिर्फ़ दिल्ली वालों को इलाज होगा। उन्होने कहा दिल्ली सरकार के अधीन अस्पतालों के पास दस हज़ार बेड हैं , वे केवल दिल्ली वालों के लिए रिज़र्व होने चाहिए, बाक़ी केंद्र सरकार के अधीन अस्पतालों में 10 हज़ार बेड है, उसमें देश भर से मरीज़ आकर अपना इलाज करवा सकते हैं। लेकिन दिल्ली सरकार द्वारा लिए गए इस फ़ैसले को एलजी अनिल बैजल ने ख़ारिज कर दिया।
अनिल बैजल ने कहा बाहरी राज्यों से आने वाले किसी भी व्यक्ति को इलाज के लिए मना नहीं किया जाएगा। अनिल बैजल के फ़ैसले के बाद केजरीवाल ने कहा दिल्ली में सबका इलाज होगा यह समय आपस में लड़ने का नहीं है, एलजी के आदेशों का पालन किया जाएगा। केजरीवाल ने दिल्ली की भावी स्थिति का अनुमान लगाते हुए बैड की माँग की है, उन्होंने कहा 15 जून तक दिल्ली में 44 हज़ार केस होने का अनुमान है, 30 जून तक एक लाख केस, 15 जुलाई तक 2.25 लाख केस और 31 जुलाई तक 5.32 लाख के होने की संभावना है। जिसके लिए दिल्ली सरकार को 15 जून तक 6,681 बेड की आवश्यकता होगी, 30 जून तक 15 हज़ार बेड, 15 जुलाई तक 33 हज़ार बेड, 31 जुलाई तक 80 हज़ार बेड की आवश्यकता पड़ेगी। केजरीवाल ने कहा अगर अन्य राज्यों से लोग दिल्ली में इलाज कराने आते हैं तो हमें लगभग डेढ़, लाख बेड की आवश्यकता होगी। अरविंद केजरीवाल प्रेस कॉन्फ़्रेन्स के माध्यम से लगातार स्वच्छता पर ज़ोर देते हैं वह कहते हैं कोरोना को हमें जन आंदोलन बनाना है, हमें मास्क पहनना है, लगातार साबुन से हाथ धोने हैं, और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना।

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