Source - PTI

विकास दुबे की 10 जुलाई को सुबह कथित एनकाउंटर में मौत हो गई. उसे 9 जुलाई को उज्जैन के महाकाल मंदिर से पकड़ा गया था. एमपी पुलिस ने उसे उत्तर प्रदेश एसटीएफ को सौंप दिया था. इस बारे में एक खुलासा हुआ है कि यूपी एसटीएफ विकास दुबे को बिना ट्रांजिट रिमांड के ही लेकर जा रही थी. एमपी पुलिस ने 9 जुलाई को ही यह जानकारी दे दी थी. 10 जुलाई को एमपी पुलिस के इंटेलिजेंस विभाग के असिस्टेंट डारेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (एडीजी) आदर्श कटियार और महाकाल थाने के इंचार्ज अरविंद तोमर ने भी इस बात की पुष्टि की. बता दें कि विकास दुबे को महाकाल थाना पुलिस ने ही पकड़ा था.

लेकिन यूपी एसटीएफ का दावा है कि वह विकास दुबे को उज्जैन कोर्ट से ला रही थी. एसटीएफ की ओर से एनकाउंटर के बारे में जारी प्रेस नोट में यह दावा किया गया है. ऐसे में साफ है कि यूपी एसटीएफ या एमपी पुलिस में से कोई एक झूठ बोल रहा है.

एमपी पुलिस के एडीजी ने क्या कहा

‘द हिंदू’ को (एडीजी) आदर्श कटियार ने बताया कि ट्रांजिट रिमांड यूपी एसटीएफ को लेना था, क्योंकि विकास दुबे उनका वॉन्टेड था. यह उनका काम होता है. वहीं महाकाल थाने के इंचार्ज अरविंद तोमर ने कहा कि दुबे को यूपी ले जाने के बारे में उज्जैन एसपी के पास कानपुर पुलिस की अर्जी आई थी. इसमें कहा गया था कि दुबे फरार है और उस पर इनाम है. ऐसे में न्यायिक प्रक्रिया पूरी करने के लिए उसे सौंप दिया जाए. ऐसे में दुबे को यूपी एसटीएफ को सौंप दिया गया.

एमपी पुलिस ने सफाई में क्या कहा

9 जुलाई को विकास दुबे को पकड़े जाने के बाद उज्जैन पुलिस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. इसमें भी एसपी मनोज कुमार सिंह ने कहा था कानपुर एसएसपी ने उन्हें लिखित अर्जी दी थी. इसमें कहा था कि विकास दुबे वहां पर वॉन्टेड है, इसलिए उसे उन्हें सौंप दिया जाए. इस पर एमपी पुलिस ने उसे सौंप दिया.

जब उनसे पूछा गया कि क्या ट्रांजिट रिमांड किसी दबाव या विशेष कारण के चलते नहीं लिया गया? इस पर उज्जैन एसपी ने कहा कि कोई दबाव नहीं था. यह मामला वीभत्स था, इसलिए विकास दुबे को हिरासत में रखा गया.

उज्जैन पुलिस ने गिरफ्तारी का मामला भी दर्ज नहीं किया

विकास दुबे को पकड़े जाने के बाद उज्जैन पुलिस ने मामला भी दर्ज नहीं किया. इस बारे में एसपी मनोज कुमार सिंह ने कहा कि मामला पहले से कानपुर में दर्ज था. आठ पुलिसवाले वहां पर शहीद हुए हैं. इसलिए कहीं भी कोई टेक्निकल दिक्कत न हो, कोर्ट की दिक्कत न हो, इसलिए बहुत ध्यान से, गंभीर विषय को देखते हुए उसे रवाना किया गया.

वहीं यूपी एसटीएफ ने प्रेस नोट में दावा किया कि विकास दुबे को उज्जैन कोर्ट में पेश किया गया था. एसटीएफ ने बताया,

पांच लाख रुपये का इनामी आरोपी विकास दुबे महाकाल मंदिर उज्जैन से गिरफ्तार किया गया. इस सूचना पर विकास दुबे को 9 जुलाई को यूपी एसटीएफ उज्जैन कोर्ट से नियमानुसार कानपुर नगर की कोर्ट में पेश करने के लिए ला रही थी. 

विकास दुबे के एनकाउंटर पर पहले से ही सवालों की एक लंबी लिस्ट है. उसी लिस्ट में ट्रांजिट रिमांड का सवाल भी जुड़ गया है.

क्या होता है ‘ट्रांजिट रिमांड’

पुलिस किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करती है, तो उसे गिरफ्तारी के समय से 24 घंटे के अन्दर अदालत में पेश करती है. यह प्रावधान सीआरपीसी की धारा 57 और धारा 76 में है. लेकिन जब ऐसी परिस्थितियां होती हैं कि जिस व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है, वह किसी दूसरे प्रदेश या ज़िले में है, जहां से उसे 24 घंटे के अन्दर गिरफ्तारी वारंट जारी करने वाली कोर्ट में पेश करना संभव नही है, ऐसी स्थिति में पुलिस उस गिरफ्तार व्यक्ति को जिस ज़िले में गिरफ्तार किया है, वहां की नजदीकी अदालत में पेश करती है. तब कोर्ट आरोपी को रिमांड पर लेकर उसे पुलिस की हिरासत में भेज देती है. इसी रिमांड को ही ‘ट्रांजिट रिमांड’ कहते हैं.

उदाहरण के लिए,

विकास दुबे पर केस कानपुर जिले में दर्ज था. लेकिन उसे मध्य प्रदेश के उज्जैन में पकड़ा गया. ऐसे में कानपुर पुलिस उज्जैन में कोर्ट में विकास दुबे को ले जाने के लिए रिमांड मांगती, जिससे कि वह कानपुर में विकास दुबे से पूछताछ कर सके और केस चला सके. इस पर कोर्ट से जो परमिशन मिलती है, वही ट्रांजिट रिमांड होती.

बता दें कि विकास दुबे 10 जुलाई को सुबह कानपुर ले जाते समय कथित मुठभेड़ में मारा गया. पुलिस ने बताया कि उसने भागने की कोशिश की. रोकने पर फायरिंग की. जवाबी फायरिंग में वह ढेर हो गया.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here