चीन इकलौता ऐसा देश है जिसे पूरा विश्व घृणा की नज़र से देख रहा है, जब पूरा विश्व कोरोना महामारी जैसे संकट से जूझ रहा था, चीन उस वक़्त भी लाभ कमाने का सोच रहा था। कोरोना वायरस का पहला केस चाइना में वर्ष 2019 के आख़िर में पाया गया, चाइना से यह महामारी पूरे विश्व में फैल गई है। आज पूरा विश्व कोरोना की चपेट में है, देश की अर्थव्यवस्था को भारी हानि हुई है, लेकिन चीन वैश्विक महामारी के समय में भी अपनी हरकतों से बाज़ नहीं आया उसने भारत को 5 लाख दोषपूर्ण परीक्षण किट भेजी और मुनाफ़ा कमाया, ऐसा उसने केवल भारत के साथ ही नहीं बल्कि पाकिस्तान और कनाडा को दोषपूर्ण मास्क भेज कर भी काफ़ी लाभ कमाया।
हाइड्रॉक्सिक्लोरोक्वीन
आज पूरा विश्व कोरोना की वैक्सीन खोजने में लगा है, लेकिन भारत में हाइड्रॉक्सिक्लोरोक्वीन नामक दवाई का उपयोग कर कई कोरोना मरीज़ों को ठीक किया गया, ख़ास तौर पर इस दवाई का प्रयोग मलेरिया में किया जाता है, लेकिन जब पता चला हाइड्रॉक्सिक्लोरोक्वीन कोरोना में भी कारगर सिद्ध हो सकती है तब इस दवाई की माँग वैश्विक स्तर पर बढ़ गई। पूरे विश्व में इस दवाई का सबसे बड़ा उत्पादक भारत है। भारत ने पचास मिलियन हाइड्रॉक्सिक्लोरोक्वीन दवाई अमेरिका को निर्यात की, अमेरिका के साथ भारत ने अन्य 55 देशों को हाइड्रॉक्सिक्लोरोक्वीन दवाई सप्लाई की गई।
पीपीई किट उत्पादन
कोरोना महामारी से बचने के लिए लॉकडाउन किया गया, लेकिन लॉकडाउन ने निजी कंपनियों को चौपट कर दिया, निजी कंपनियों को लॉक डाउन के समय भारी नुक़सान हुआ, इस नुक़सान से बचने के लिए निजी कंपनियों ने पीपीई किट का निर्माण करना शुरू किया। एक के बाद एक कई अन्य निजी कंपनियों ने पीपीई किट का उत्पादन शुरू किया। आज हमारे देश में प्रतिदिन साढ़े चार लाख पीपीई किट का उत्पादन किया जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में कहा था इस महामारी से पूर्व हमारे देश में पीपीई किट का उत्पादन नहीं किया जाता था, लेकिन ज़रूरत के समय हमने अपने देश में पीपीई किट का उत्पादन किया। हमें आने वाले समय में स्वयं को आत्मनिर्भर बनाना है, यही हमारा पहला क़दम था आत्मनिर्भर बनने की ओर। कोरोना जैसी महामारी से बचने के लिए स्वच्छता पर ज़ोर दिया गया, 20 सेकंड तक हाथ धोना, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना तथा अपने साथ सेनिटाईज़र की बोटल साथ रखने पर ज़ोर दिया गया। भारत सेनिटाईज़र के लिए भी इधर उधर हाथ पाव मार रहा था,
लेकिन इसका भी समाधान भारत में ही ढूंढ निकाला गया। छत्तीसगढ़ में महुआ नामक फूल होता है, जो देसी दारू बनाने के काम आता है। छत्तीसगढ़ की आदिवासी महिला ने उस फूल के ज़रिए सेनिटाईज़र का आधार तैयार किया जिससे आज पूरे भारत में सेनिटाईज़र की आपूर्ति की जा रही है, इसका पूरा श्रेय हैं उस आदिवासी महिला को जाता है, यही हमारा दूसरा क़दम था आत्मनिर्भर बनने की ओर।
अमेरिकन कंपनियों का चाइना से भारत की ओर पलायन
सभी देशों का मानना है कि चाइना ने कोरोना वायरस इरादतन सभी देशों में फैलाया है, इसी कारण अब सभी देश चाइना से पल्ला झाड़ रहे हैं। अमेरिका और चाइना के बीच अधिक मन मुटाव देखने को मिल रहे हैं, ख़बरें है कि अमेरिका की हज़ार कंपनियां जो चाइना में स्थित है वह चाइना से पलायन कर भारत में स्थापित होंगी। इनमें से लगभग 300 कंपनियों ने भारत के साथ काग़ज़ी कार्रवाई भी कर ली है। अमेरिका का मानना है कि चाइना के बाद भारत बेहतरीन विकल्प है।
इन कंपनियों के भारत के छोटे छोटे राज्यों में स्थापित होने की संभावना है।
यह सच है कि हम चाइना की वस्तुओं को एक दिन में बायकॉट नहीं कर सकते क्योंकि हमारे पास विकल्प नहीं है लेकिन इस महामारी के समय हमें यह पता चल गया है की हमारे अंदर आत्मनिर्भर बनने की क्षमता है। हम भारतीयों ने इस आपदा को अवसर में बदला है। हमारी कोशिश यही रहेगी हम उस हर चीज़ का उत्पादन करें जिससे हमें चाइनीज़ वस्तुओं की आवश्यकता ना पड़े।

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