कोरोना महामारी के चलते सभी स्कूलों को 15 मार्च से बंद कर दिया गया ताकी स्कूली बच्चे इस बीमारी से आहत न हो। 22 मार्च जनता कर्फ्यू के बाद जब यह लगने लगा कि यह महामारी आसानी से क़ाबू में नहीं आएगी तो देश व्यापी लॉकडाउन का ऐलान किया गया। इस महामारी के कारण बच्चों की पढ़ाई का नुक़सान न हो इसलिए स्कूल प्रशासन ने बच्चों को ऑनलाइन क्लैसेज़ उपलब्ध कराई। देश व्यापी लॉकडाउन को चलते दो महीने से ऊपर हो चुके हैं, सभी स्कूल कॉलेज बंद हैं। दफ्तरों में भी कुछ ही लोगों को आने की अनुमति है। इस लॉक्डाउन के चलते लोगों को भारी मात्रा में रोज़गार गंवाना पड़ा। जिन लोगों के रोज़गार गए है, उनके पास आय का कोई दूसरा स्रोत नहीं बचा है। जिन पेरेंट्स के बच्चे स्कूलों में पढ़ते हैं जहाँ भारी फ़ीस ली जाती है, उन सभी पेरेंट्स ने एक अभियान शुरू किया है “नो स्कूल, नो फ़ीस” पेरेंट्स की सरकार और स्कूल प्रशासन से यही माँग है कि उनके बच्चों की फ़ीस माफ़ की जाए।
हमारे देश में ऐसे बच्चे भी मौजूद है जिनके माँ बाप नहीं है, वह बच्चे अपने दादा दादी या अन्य रिश्तेदारों के पास रहते हैं, शायद वह इतने सबल न हो कि वह लॉकडाउन में भी जहाँ आय का कोई स्रोत ही नहीं है, ऐसे कठिन दौर में भी बच्चों की फ़ीस दे पाए, सरकार से गुज़ारिश है कि वे उनकी तरफ़ भी रुख़ करे। झारखंड की राज्य सरकार ने सभी स्कूलों की फ़ीस माफ़ करने का बड़ा फ़ैसला लिया है।
सूत्रों से यह भी ख़बर है कि जुलाई में स्कूल खोलने की बात कही गई है, इस बात से पेरेंट्स काफ़ी ख़फ़ा हैं, उनका मानना है कि स्कूल से पहले “संसद और पार्लियामेंट” खोला जाए और ये बात जायज़ भी है। बड़ों के मुक़ाबले छोटे बच्चों का इम्यून सिस्टम काफ़ी कमज़ोर होता है, छोटे बच्चों को बीमारिया जल्दी लगती है, जिस कारण उन्हें काफ़ी सावधानी के साथ रखा जाता है।
स्कूल खोले जाने की बात पर पेरेंट्स सोशल मीडिया के ज़रिए अपना रोष प्रकट कर रहे हैं। ऑल इंडिया पेरेंट्स असोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री अशोक अग्रवाल ने सभी राज्य सरकारों और केंद्र सरकार से स्कूल ना खोलने की अपील की। उन्होंने अपने जीवन का एक क़िस्सा बताते हुए कहा कि 1966 में जब सभी टीचर्स की हड़ताल पर चले गए थे, तब मुख्य कार्यकारी पार्षद विजय मल्होत्रा ने यह फ़ैसला लिया कि सभी बच्चों को अगली क्लास में पदोन्नति की जाएगी। श्री अशोक अग्रवाल जी को भी नौवी से दसवीं क्लास में भेजा गया था। उनका मानना है कि यह संभव तौर पर हो सकता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here