इन दिनों भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर काफ़ी गरमागरमी का माहौल है, हाल ही में हमारे 20 जवानों की शहादत के बाद पूरे देश में बायकॉट चीन का नारा लग रहा है, चीनी सामान के बहिष्कार को लेकर अलग – अलग राज्यों में रोष प्रकट किया जा रहा है। इन दिनों चीन को सबसे बड़ा झटका महाराष्ट्र सरकार द्वारा पहुँचा, महाराष्ट्र सरकार ने चीन की तीन कम्पनियों पर रोक लगा दी जो मुंबई के तालेगांव में स्थापित की जानी थी। इनमें से एक इलेक्ट्रिक वाहन की फ़ैक्ट्री स्थापित की जानी थी, जिसका तक़रीबन 35,00 करोड़ का प्रोजेक्ट था, इस कम्पनी में चीनी सरकार का 1000 करोड़ निवेश होता जिसमें तक़रीबन 1500 भारतीयों को रोज़गार मिलता। देश के बिगड़ते हालात को देखकर महाराष्ट्र सरकार ने बीते दिन यह बड़ा फ़ैसला लिया। शिवसेना ने कहा बहुत सारे ऐसे राज्य हैं जहाँ भाजपा की सरकार है जैसे गुजरात उत्तर प्रदेश ऐसे राज्य चीनी कंपनियों को स्थापित करने के लिए लुभा रहे हैं, यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा है लेकिन क्या ये राज्य चीनी कंपनियों के ख़िलाफ़ कोई क़दम उठा रहे है?
महाराष्ट्र सरकार ने केंद्र पर हमला करते हुए कहा क्या देश भक्ति दिखाने की ज़िम्मेदारी केवल महाराष्ट्र सरकार की है, साथ ही साथ उन्होंने कहा अगर हम चीनी सामान का बहिष्कार नहीं करते हैं तो यह हमारे जवानों की शहादत का अपमान होगा। उन्होंने कहा कोरोना महामारी के चलते सम्पूर्ण विश्व की अर्थव्यवस्था को आहत पहुँची है और यह सही समय होगा कि हम इस मौक़े का फ़ायदा उठाकर चीन को त्याग दें, अमेरिकी और यूरोपीय कंपनियां भी चीनी बाज़ारों से बाहर निकलने की कोशिश कर रही है। चीन भारतीय बाज़ारों पर अपना नियंत्रण जमा चुका है लेकिन हमें इससे बाहर निकलना है चीन से आयात बंद करना है और कदम आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाना है। शिवसेना ने प्रधानमंत्री और अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प की बढ़ती दोस्ती पर चुटकी ली और कहा चीन से लड़ने के लिए हमें ट्रंप की ज़रूरत नहीं है। वाक़ई हमारी सेना अपनी मातृभूमि की हिफ़ाज़त के लिए सबल है।

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