मजदूरों को लाने की व्यवस्था हो, उनका किराया देने की बात हो या फिर क्वारंटाइन सेंटर में उनके रहने और खाने की व्यवस्था. नीतीश सरकार इन सभी मुद्दों पफर अपना स्टैंड एकमत नहीं कर पा रही है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुद ऐलान किया था कि बाहर से आने वाले सभी प्रवासी मजदूरों के खाते में किराया और हजार रूपया दिया जाएगा. उसके बाद कहा कि खुद से भी आ रहे मजदूरों को पैसा दिया जाएगा.

अब नीतीश सरकार ने फिर से एक फरमान जारी करते हुए ऊपर के फैसलों में एक शर्त जोड़ दिया है कि जिनका बैंक एकाउंट बिहार में होगा मात्र उसे ही पैसा दिया जायेगा. बता दें कि बिहार सरकार के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत के नाम से जारी एक पत्र में कहा गया है कि बिहार के क्वॉरेंटाइन सेंटर में ट्रेनों से आए प्रवासी मजदूरों के अतिरिक्त अन्य माध्यम से आए मजदूरों को हजार रुपए की राशि तभी दी जाएगी जब उनका बैंक खाता बिहार का होगा.

यह आदेश 15 मई की तारीख में जारी किए गए हैं. इससे पहले सरकार ने स्पष्ट किया था कि सभी मजदूरों को आसानी से सहयोग राशि मुहैया करवाई जाएगी. लेकिन अब इसमें तुगलकी नियम और शर्त डालना मजदूरों के परेशानी को और बढ़ा दिया है. तर्क के तौर पर यह भी कहा जा सकता है कि जो प्रवासी मजदूर क्वॉरेंटाइन सेंटर में भर्ती हैं वह दूसरे राज्यों में रहकर अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं तो स्वभाविक रूप से उनका बैंक खाता उसी राज्य का होगा, जहां पर वह काम करते हैं. बहुत कम ही ऐसे मजदूर होंगे जिनका खाता बिहार का हो सकता है. सरकार के इस फैसले ने एक बार फिर से मजदूरों को परेशानी में डाल दिया है.

Input – ABP

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