वीर सावरकर के नाम से जाने वाले विनायक दामोदर सावरकर भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन के अग्रिम पंक्ति के सेनानी और प्रखर राष्ट्रवादी नेता थे। इनका जन्म 28 मई 18,83 में महाराष्ट्र के एक छोटे से गाँव भागुर में हुआ ।बचपन से ही इन्होंने क्रांतिकारियों की कहानियां सुनी थी, इसलिए जैसे-जैसे वे बड़े हुए वीर सावरकर के अंदर भी क्रांतिकारी भावना ने जन्म लिया।

सन् 1900 में इन्होंने किशोरों का एक संघ बनाया जिसे ‘मित्र मेला’ का नाम दिया गया यह उन किशोरों का संघ था जिनमें क्रांतिकारी भावना थी जो चाहते थे भारत को आज़ादी मिले। इनका यह संघ हिन्दू त्योहारों पर हिंदू लोगों को एकत्रित करते तथा उन्हें एकता का पाठ पढ़ाते। वीर सावरकर हिंदू महासभा के नेता थे वह अपने जीवन काल में छह बार हिंदू महासभा के अध्यक्ष रहे । स्वतंत्रता संग्राम में भी वीर सावरकर का बहुत बड़ा योगदान माना जाता है। यह पूर्णत्या हिंदुवादी नेता थे। 1904 में उन्होंने अभिनव भारत की स्थापना की।

1905 बंगाल में सावरकर ने विदेशी वस्त्रों की होली जलाई । बताया जाता है की वीर सावरकर रूसी क्रांतिकारियों से बहुत अधिक प्रभावित थे।वीर सावरकर ने लंदन से पढ़ाई की तथा लंदन में उन्होंने इंडिया हाउस में रहना शुरू किया ।
उस समय इंडिया हाउस राजनीतिक क्रियाकलापो का केंद्र था । वीर सावरकर ने 1857 की क्रांति पर आधारित किताबे पढी और “The History of the War of Indian Independence” नामक किताब लिखी। अपनी इन गतिविधियों से वे लोगों को जागरूक करना चाहते थे तथा एक आज़ाद भारत चाहते थे। 1909 में अंग्रेज़ी अफ़सर कर्ज़न की हत्या के सिलसिले में वीर सावरकर को गिरफ़्तार कर लिया गया । इसके बाद नासिक ज़िले के कलेक्टेर जैक्सन की हत्या के जुर्म में उन्हें कला पानी की सजा सुनाई गयी लेकिन 1920 में वल्लभ भाई और बाल गंगा धर तिलक द्वारा अंग्रेज़ी सरकार से की गयी दया याचिका के अनुसार उन्हें रिहाई मिली तथा सावरकर भी समझ गये थे जेल में रहकर कुछ सम्भव नहीं ।हिन्दुत्व विचारधारा के कारण आजादी के बाद की सरकारों ने उन्हें वह महत्त्व नहीं दिया जिसके वे वास्तविक हकदार थे।

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