साल 1990 से लेकर 2008 तक अनिल कुंबले भारतीय क्रिकेट के ऐसे फाइटर रहे, जिन्होंने भारतीय टीम के लिए न सिर्फ मैच बचाए, बल्कि जिताए भी. लेकिन 1998 में टीम इंडिया के इस लिजेंड को साथ मिला एक 18 साल के पतले-दुबले सरदार का. शुरुआत में जिन कुंबले की वजह से भज्जी की टीम में जगह नहीं बन पा रही थी, बाद में उन्हीं कुंबले के साथ मिलकर भज्जी ने ऐसी जोड़ी बनाई कि फिर विरोधी टीमों का असर भारत के खिलाफ बेअसर होने लगा.

हरभजन सिंह भारतीय क्रिकेट के ‘ग्रेट’ हैं. उन्होंने अपनी कमाल की स्पिन गेंदबाज़ी से खूब नाम कमाया और अपने भिड़ जाने वाले एटीट्यूड से विवादों में भी रहे. फिर चाहे वो विवाद ऑस्ट्रेलिया में हुआ ‘मंकीगेट’ हो या फिर श्रीसंत के साथ ‘थप्पड़ कांड’. लेकिन उनके साथ एक विवाद तो ऐसा हो गया, जो उन्होंने कभी सोचा भी नहीं होगा.

वैसे तो हरभजन सिंह की टीम इंडिया में एंट्री अज़हर की कप्तानी में ही हो गई थी. लेकिन 2001 में सौरव गांगुली की कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज़ उनके करियर का टर्निंग पॉइंट रही, जिसके बाद भज्जी टीम में फिक्स हो गए.

जब न्यूज़ीलैंड एयरपोर्ट पर रोक दी गई भज्जी की एंट्री

साल 2002 के आखिर में दो मैचों की टेस्ट सीरीज़ के लिए भारतीय टीम को न्यूज़ीलैंड जाना था. लेकिन नवंबर के आखिर में न्यूज़ीलैंड दौरे पर रवाना होने से ठीक पहले यानी 28 नवंबर को हरभजन की बहन की शादी थी. उससे ठीक पहले वो मैच खेलने में व्यस्त थे. आनन-फानन में दौड़-भाग करते हुए 26 नवंबर 2002 की रात हरभजन विजयवाड़ा से मैच खेलकर जालंधर लौटे.

हरभजन सिंह परिवार के साथ. फोटो: Bhajji FB

विजयवाड़ा से जालंधर आने के लिए सीधी कोई फ्लाइट नहीं थी. पहले वो वहां से हैदराबाद और फिर दिल्ली होते हुए जालंधर पहुंचे. अपनी बहन की शादी में वो इतना व्यस्त थे कि उन्हें खाने तक का वक्त नहीं मिला. शादी के तुरंत बाद उन्हें टीम के साथ न्यूज़ीलैंड के लिए रवाना होना था.

जैसे-तैसे बहन की शादी निपटाकर भज्जी टीम के साथ फ्लाइट में जा बैठे. 26 तारीख से लेकर 28 तारीख तक लगातार सफर और फिर बहन की शादी की थकान का असर ये था कि उन्हें फ्लाइट में ही 104 डिग्री बुखार हो गया.

हरभजन सिंह. फाइल फोटो

खैर, फ्लाइट न्यूज़ीलैंड पहुंची. दादा की कप्तानी वाली पूरी टीम फ्लाइट से उतरी और एयरपोर्ट से बाहर निकलने लगी. बाकी खिलाड़ियों की तरह ही भज्जी के पास उस वक्त एक लाल रंग का बैग था. बैग में उनकी किट और सामान था. उस बैग में बाकी सामान के साथ-साथ उनके कई जूते भी रखे थे. लेकिन जब एयरपोर्ट से बाहर निकलते वक्त वो बैग स्कैन-मशीन से निकला, तो एक अधिकारी ने वहां हंगामा कर दिया.

दरअसल भज्जी के बैग में जो जूते थे, वो बहुत ज़्यादा गंदे थे. हरभजन के जूतों के स्पाइक्स के पास कई किस्म की मिट्टी लगी हुई थी. विजयवाड़ा में खेले मैच की गंदगी उनके जूतों पर थी. गंदे जूते देखकर विवाद इतना बढ़ा कि उस अधिकारी ने कहा,

”इस बैग में रखे जूते काफी गंदे हैं. उनमें काफी ज़्यादा मिट्टी लगी हुई है. इन्होंने जूतों को बैग में छुपाकर वहां से निकालने की कोशिश की है.”

जूते के पीछे हुए इस विवाद का असली कारण था न्यूज़ीलैंड का नियम. दरअसल न्यूज़ीलैंड में गंदे जूते पहनकर या ले जाने की मनाही है. वहां के कृषि मंत्री का मानना है कि जूतों की गंदगी के जरिए कई किस्म की बीमारियां आ जाती हैं.

बाकी टीम के खिलाड़ी बाहर निकले, लेकिन भज्जी वहीं फंस गए. एयरपोर्ट के बाहर फैंस भज्जी से मिलने का इंतज़ार कर रहे थे, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जीत के बाद हरभजन सिंह एक बड़े स्टार बन चुके थे. लेकिन एयरपोर्ट स्टाफ उन्हें बाहर आने की इजाज़त नहीं दे रहा था. इस बात को लेकर काफी देर तक विवाद होता रहा. आखिरकार लंबी ज़िद-बहस के बाद हरभजन को फाइन देना पड़ा और तब जाकर वो वहां से बाहर निकल पाए.

हरभजन सिंह. फाइल फोटो

न्यूज़ीलैंड के खिलाफ उस दौरे पर भारतीय टीम दोनों टेस्ट हार गई. लेकिन इसके बाद हरभजन सिंह ने शायद कसम ही खाई होगी कि पूरे करियर में विदेश में उनका सबसे बेहतरीन गेंदबाज़ी औसत न्यूज़ीलैंड के खिलाफ ही रहा. न्यूज़ीलैंड में उनका गेंदबाज़ी औसत 24.19 का रहा, जो कि क्रिकेट में किसी भी देश में उनका सबसे बेहतर है. इतना ही नहीं, साल 2002 उनके 17 साल लंबे करियर का सबसे बेहतरीन साल भी रहा. इस साल उन्होंने सबसे अधिक 63 विकेट अपने नाम किए थे.

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