उत्तर प्रदेश. यहां कुछ जिलों में कोविड किट घोटाले का मामला सामने आया है. आरोप है कि सहारनपुर, गाजीपुर, सुल्तानपुर, बिजनौर, बाराबंकी सहित कुछ जिलों में कोविड से रिलेटेड कुछ उपकरण, जैसे पल्स ऑक्सीमीटर और इन्फ्रारेड थर्मामीटर ब़ाजार मूल्य से ज्यादा पर खरीदे गए. ये मामले उठाने वाले बीजेपी के नेता ही हैं.

10 सितंबर को योगी सरकार ने इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया है. ‘पीटीआई’ की खबर के मुताबिक, एक सरकारी बयान में कहा गया है कि शासन ने राजस्व विभाग की अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार की अध्यक्षता में एसआईटी गठित की है. चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव अमित गुप्ता और नगर विकास सचिव विकास गोठलवाल इस टीम के मेंबर होंगे. एसआईटी मामले की जांच कर 10 दिन में अपनी रिपोर्ट पेश करेगी.

सहारनपुर से नया मामला

इस तरह का नया मामला सहानरपुर से सामने आया है. बीजेपी सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रदेश सह-संयोजक रामपाल सिंह पुंडीर ने सफाईकर्मी किट में घोटाले का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है. इसके लिए लेटर लिखा है. सीएम को लिखे इस लेटर में पुंडीर ने आरोप लगाया है-

जिला पंचायत राज अधिकारी ने सफाईकर्मी किट 5200 रुपये में खुद खरीदकर ग्राम पंचायतों में भुगतान कराया. बिल ‘डिजिटल इंडिया कॉन्ट्रेक्टर एंड सप्लायर्स’ के नाम से दिया गया है. इसका पता नानौता के एक इंटर कॉलेज का दिखाया गया है, जबकि नानौता में इस नाम से इंटर कॉलेज पर कोई भी दुकान या फर्म नहीं है.

इसी प्रकार कोविड किट में इन्फ्रारेड थर्मामीटर की कीमत बिल में 2270 रुपये दिखाई गई है. पल्स ऑक्सोमीटर की कीमत बिल में 1920 रुपये दिखाई गई है. यह बिल ‘जनवाणी एसोसिएट्स’, बी-291, जनवाणी भवन, अपोजिट न्यू जगदम्बा ट्रांसपोर्ट के नाम से जारी किया गया है. उसमें स्थान का नाम नहीं दिया गया है. कोविड किट की कुल कीमत 4190 रुपये प्रति ग्राम पंचायत बैंक शिवालिक मर्केंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक शाखा हकीकत नगर में कराया गया है.

उन्होंने इसकी जांच की मांग की है. वहीं इस लेटर को आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने ट्वीट कर योगी सरकार पर हमला बोला है.

सुल्तानपुर में उठा था पहला मामला

कोविड से जुड़े उपकरणों को बाजार की कीमत से ज्यादा पर खरीदने का मामला सबसे पहले सुल्तानपुर से आया. बीजेपी के ही विधायक देवमणि द्विवेदी ने सुल्तानपुर की डीएम सी. इंदुमती पर ऑक्सीमीटर और थर्मामीटर की खरीद को लेकर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया. उनका आरोप था कि शासनादेश था कि 2800 रुपये में किट खरीदी जाए, लेकिन इसके स्थान पर डीएम ने 9950 रुपये में यह किट खरीदने के लिए गांव की पंचायतों पर दबाव बनाया. उन्होंने सीएम को एक लेटर लिखा. इस लेटर के बाद सीएम के सचिव संजय प्रसाद ने पंचायती राज विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी को जांच के लिए कहा.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जांच में शिकायत सही पाई गई. इसके बाद कृष्ण कुमार सिंह चौहान, पंचायत राज अधिकारी, सुल्तानपुर को सस्पेंड कर दिया गया.

इसी तरह गाजीपुर के जिला पंचायत राज अधिकारी अनिल कुमार सिंह पर आरोप है कि उन्होंने पल्स ऑक्सीमीटर और इन्फ्रारेड थर्मामीटर के लिए 5800 रुपये का बिल बनाया. अनिल कुमार सिंह को निलंबन काल में उप निदेशक (पंचायत) वाराणसी मंडल के कार्यालय से अटैच किया गया है. उन पर लगे आरोपों की जांच उप निदेशक (पंचायत) अयोध्या मंडल करेंगे.

बिजनौर

इसी तरह का मामला बिजनौर से सामने आया है. आरोप है कि यहां पांच गुना महंगी कोविड किट खरीदी गई है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जीएसटी सहित 12,390 रुपए के रेट से इन्फ्रारेड थर्मामीटर और 3360 रुपए की दर से पल्स ऑक्सीमीटर खरीदे गए. करीब पांच गुना दामों पर यह खरीद हुई. सीएमओ, बिजनौर ने सहारनपुर की फर्म याशिका इंटरप्राइजेज से जीएसटी सहित 12,390 रुपये प्रति की दर से 12 इन्फ्रारेड थर्मामीटर खरीदे. सहारनपुर की ही फर्म आयुषी इंटरप्राइजेज से जीएसटी सहित 3360 रुपये की दर से 20 पल्स ऑक्सीमीटर खरीदे.

इस मामले में सीएमओ, डॉक्टर विजय कुमार यादव का कहना है कि जो खरीद हुईस वो जैम पोर्टल से हुई. उस समय इस पोर्टल पर उपलब्ध उस समय के न्यूनतम दामों के अनुसार खरीद की गई. खरीद में नियमों का पालन किया गया.

बाराबंकी

बाराबंकी में भी 2800 रुपए की किट 8800 में खरीदे जाने के आरोप लगे हैं. ‘अमर उजाला’ की खबर के मुताबिक, करीब सौ गांव में निर्धारित कीमत से अधिक भुगतान कर दिया गया. हालांकि एक हजार ग्राम पंचायतों में अभी भुगतान नहीं हुआ है. देवा ब्लॉक की 88 ग्राम पंचायतों में से 42 ग्राम पंचायतों में कोरोना किट का भुगतान सात हजार से लेकर आठ हजार रुपये तक फर्म को किया जा चुका है. हालांकि बीडीओ और एडीओ, देवा पंचायत का दावा है कि सरकारी रेट पर ही पल्स ऑक्सीमीटर और थर्मामीटर की खरीद की गई है.

किसने क्या कहा?

अपर मुख्य सचिव, पंचायती राज, मनोज कुमार सिंह का कहना है-

सभी जिलों से खरीद के संबंध में सूचनाएं मांगी गई हैं. जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि पल्स ऑक्सीमीटर और इन्फ्रारेड थर्मामीटर का भुगतान 2800 रुपए से ज्यादा न किया जाए.

इन जिलों से इस तरह के मामले सामने आने के बाद राजनीति गरमाई है. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने ट्वीट किया-

न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक उप्र में कोरोना किट खरीदी में घोटाला हुआ है. क्या पंचायत चुनावों के साल में जिले-जिले वसूली केंद्र बना दिए गए हैं? PPE किट घोटाला, 69K घोटाला, बिजली घोटाला.. पहले घोटाला, फिर सख्ती का नाटक और फिर घोटाला दबाना…अजीब दास्तां है ये, कहां शुरू कहां खत्म..

सपा के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व मंत्री अवधेश प्रसाद ने कोविड किट घोटाले का ठीकरा राज्य सरकार पर फोड़ा. इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘आपदा में अवसर’ तलाशने की नज़ीर बताया. कहा कि यही कारण है कि कोविड घोटाले की खबरें सुर्खियां बनने के बावजूद जिले में अभी कार्रवाई नहीं हुई. विपक्ष ने नहीं, सत्तापक्ष के विधायक ने कोविड किट घोटाले का आरोप लगाया था.

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